हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं जहाँ सही लिखने से ज़्यादा ज़रूरी हो गया है। सोशल मीडिया पर लाइक, कमेंट और फिल्टर की दुनिया ने हमें इस कदर जकड़ लिया है कि हम असल जिंदगी जीना ही भूल गए हैं। लोग अंदर से कितने भी अकेले या परेशान हों, लेकिन स्क्रीन पर उनका जीवन बिल्कुल परफेक्ट दिखना चाहिए।
इस दिखावे की संस्कृति ने समाज में एक गहरा खोखलापन पैदा कर दिया है। लोग दूसरों को प्रभावित करने के लिए वो चीजें खरीद रहे हैं जिनकी उन्हें ज़रूरत नहीं है, और वो जिंदगी जी रहे हैं जो उनकी असलियत नहीं है।
इस अंधी दौड़ में आपसी रिश्ते, शांति और मानसिक सुकून सब कुछ दांव पर लगा है।यह कलम समाज को इस आभासी भ्रम से जगाने का एक प्रयास है। असली खुशी और तरक्की किसी की स्क्रीन पर दिखने में नहीं, बल्कि अपने वास्तविक जीवन को ईमानदारी, सादगी और सुकून के साथ जीने में है।
दीपतांश (Pen As Weapon)
कुछ मनोरंजन और सुकून के पल? अगर आप दिल को छू लेने वाली कहानियाँ, गहरी कविताएँ और चुनिंदा शायरी का आनंद लेना चाहते हैं, तो एक बार मेरी साहित्यिक वेबसाइट deeptanshkikalam.com पर ज़रूर विजिट करें।