बदलते दौर का समाज: तकनीक से जुड़े, इंसानों से टूटे

आज हम एक ऐसे आधुनिक समाज में जी रहे हैं जहाँ दूर बैठे अजनबियों से जुड़ना तो आसान है, लेकिन बगल में बैठे इंसान का दर्द समझना मुश्किल हो गया है।

तकनीक ने हमारे हाथों में पूरी दुनिया तो दे दी, लेकिन हमारे दिलों से आपसी संवेदनाएं छीन लीं।

सच्ची प्रगति केवल ऊंची इमारतें या तेज इंटरनेट नहीं है। असली प्रगति तब होती है जब समाज का हर व्यक्ति नैतिक रूप से जागरूक हो।

आज हमें बड़ी-बड़ी मशीनों की नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति सहानुभूति और गहरी सोच की ज़रूरत है। यह कलम किसी व्यवस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज की इसी सोई हुई चेतना को जगाने का एक छोटा सा प्रयास है। जब तक हम इंसानी मूल्यों को नहीं बचाएंगे, तब तक हर विकास अधूरा है।—

दीपतांश (Pen As Weapon)