कलम की धार, समाज का सच

हथियार सिर्फ वो नहीं होते जो लहू बहाते हैं, सच्चे हथियार तो वो शब्द हैं जो सोए हुए समाज को जगाते हैं। जब तक समाज में अन्याय रहेगा, यह कलम चुप नहीं बैठेगी। यह शब्दों की लड़ाई है, विचारों की क्रांति है। —

दीप्तांश (Pen As Weapon)

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